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इन 5 तरीके से स्ट्रेस को स्मार्टली मैनेज करें

लगातार मीटिंग्स के बाद बुरी तरह थकी हुई, 3 मिनट का लंच ब्रेक, पांच कप कॉफी या चाय, बार-बार फोन चेक करना कि कहीं बच्चा स्कूल से घर पहुँचा की नहीं अभी, उस वीकेंड के बारे में सोचना जब आपके 10 रिलेटिव्स के लिए होस्ट बनना है, पति के साथ बैठते ही कोई नया काम याद आना…सही बात है! हमें यूँ ही मल्टी-टास्कर थोड़े ही कहा जाता है। लेकिन इन सबका फ्लिप साइड है हाई लेवल का स्ट्रेस। घर और ऑफिस या बिज़नेस संभालने वाली ऐसी कई वुमन हैं जो कि स्ट्रेस से इस कदर घिरी हुई है कि उन्हें खुद नहीं पता कि धीरे-धीरे क्या इफेक्ट पड़ रहा है। 

भले ही आज सपोर्ट सिस्टम हो, वर्कप्लेस बेनिफिट्स में वर्क फ्रॉम होम और फ्लेज़ी-ऑवर्स हो, लेकिन स्ट्रेस किसी न किसी रूप में हमेशा साथ रहता है। आज स्ट्रेस से बच नहीं सकते हैं, लेकिन उसे मैनेज करना ज़रूर सीख सकते हैं ताकि इसका कोई साइड इफेक्ट हमें और हमारी लाइफ़ में डिस्टर्बेंस पैदा न कर पाएं।

यहाँ 5 ऐसे ही टिप्स बताए जा रहे हैं जो कि स्ट्रेस को मैनेज करना आसान बनाएंगे।

सुपरवुमन न बनें

खुद से सुपरवुमन बनने की उम्मीद न करें। यह केवल एक इगोइस्टिक तरीका ही नहीं है, बल्कि यह आपके लाइफ़ में सब कुछ कंट्रोल करने की ज़रूरत के बारे में भी बताता है। स्मार्ट वुमन अपनी लाइफ़ के अलग-अलग पहलुओं को डेलिगेट करना सीखती है और अपने पतियों को भी कुछ टास्क में ज़िम्मेदारी बाँटने के लिए ट्रेन करती है।

मल्टी-टास्किंग बंद करें

ऐसी कई एविडेंस हैं कि जो बताते हैं कि मल्टी-टास्किंग न केवल हमारी लाइफ़ को जीने सही तरीका नहीं है बल्कि कई मामलों में डेंजरस भी है। कई स्टडीज़ में सामने आया है कि मल्टी-टास्क हमारे कॉग्निटिव कंट्रोल को खराब करता है। इसलिए आपको अगले टास्क पर जाने के पहले एक टास्क पर पूरा ध्यान देना चाहिए और फिर आगे बढ़ना चाहिए। इससे स्ट्रेस लेवल आसानी से कम होगा। माइंडफुलनेस या सिंगल-फोकस को बुद्धिज़्म भी बढ़ाता देता है। वैसे भी बुद्ध ने कहा है, “तुम जहां हो वही रहो, वरना तुम अपनी लाइफ़ मिस कर दोगे।’

फिर से बच्ची बन जाओ

जब आप बच्ची थी, तो जो एक्टिविटीज़ एंजॉय करती थीं, उसे फिर से अपनी लाइफ़ में लेकर आएं। घर से बाहर निकलें, म्यूज़िक प्ले करें, कार्टून देखें (OMG! जो मैं अभी भी करती हूँ और उस समय सबकुछ भूल जाती हूँ), अपने बच्चों के साथ बच्चे बन जाएं, पेड़ पर चढ़ने का मौका मिले, तो उसे मिस न करें, बॉल से खेलकर देखें और दूसरे क्या सोच रहे हैं इसकी चिंता किए बिना खुद को एक्स्प्रेस करने की फ्रीडम खुद को दें।

अपने लिए सॉफ्ट बनें

अगर आप उनमें से हैं जो केवल पूरे समय दूसरों को देने और उनके लिए काम में खुद को लगा रही हैं, तो आज ही आपको थोड़ा खुद को रोकना होगा। रूकें, थोड़ा पॉज़ लें और खुद के लिए और दूसरे के लिए जो कर रही हैं उसमें बदलाव करें। ऐसे पॉजिटिव लोगों के बीच में रहें जो कि आपको भी पॉजिटिव बनाएं और आपको खुश करें। अगर कोई आपको लगातार डाउन कर रहा हैं, तो उन्हें एनकरेज न करे और उससे इंटरेक्ट न करने के लिए खुद में गिल्ट न लाएं।

अपना एक गोल बनाएं और उसे पूरा करने में जुटें। ऐसे गोल न सेट करें जो कि अनरियलिस्टिक हों और आपको स्ट्रेस वाली कंडीशन में लेकर आएं।

“ना” कहना सीखें

बहुत ज़्यादा रिस्पॉन्सिबिलिटी लेने से हमारी प्रॉब्लम्स बढ़ जाती हैं। अब भले ही वह हमारे पति के लिए हो, इन-लॉज़ के ले हो या फिर एक्सटेंडेड फैमिल के लिए हों। ना कहना सीखें जब वह वाकई आपकी रिस्पॉन्सिबिलिटी न हो। लोगों को खुश करने वाली बनना बंद करें और यह प्रेशर न लें कि हर कोई आपको पसंद करें। अपनी ज़रूरतों को पहले आगे रखें और ना कहना सीखें। “अच्छा” बनने के ट्रैप में न आएं। पहले अपनी प्रायोरिटी सेट करें, उसे पूरा करें और फिर दूसरों की मदद के लिए निकलें।

तो चलिए, अब झटपट उठें और खुद को खुश करने के तरीके अपना लें। अगर आप खुश रहेंगी, तो दूसरों को खुश ऱख पाएंगी। 

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Sonal Sharma

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